दिल्ली सरकार का रेवेन्यू टारगेट

नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वैट राजस्व लक्ष्य को लेकर यहां के व्यापारी डर गए हैं। ये वही व्यापारी हैं जो अब तक उन्हें अपने सिर-आंखों पर बैठाये थे। आश्र्चय की बात यह है कि  केजरीवाल वैट रेवेन्यू मौजूदा लक्ष्य से करीब 50 फीसदी वृद्धि करने का इरादा जताकर, अब उन्हीं ट्रेडर्स को खटकने लगे हैं, जिन्होंने कभी उन्हें सिर-आंखों पर उठाया था। हालांकि पार्टी ट्रेड सेल डैमेज कंट्रोल में जुटा है ।

एक आर्थिक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए केजरीवाल सरकार व्यापारियों को विश्वास दिला रही है कि उन्हें किसी भी तरह से कोई भी परेशानी नहीं होगी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल सहित कई शीर्ष संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है, हालांकि उनका कहना है कि औपचारिक तौर पर अपना विरोध दर्ज कराने से पहले वे दिल्ली सरकार के बजट का इंतजार करेंगे। वहीं, कुछ व्यापारी इसलिए भी आगे नहीं आना चाहते कि सरकार स्थाई है, ऐसे में उनका विरोध उल्टा भी पड़ सकता है।

बीयूवीएम के जनरल सेक्रटरी (दिल्ली प्रदेश) हेमंत गुप्ता ने कहा, 'अगर सरकार 30,000 करोड़ का लक्ष्य रखेगी तो यह 50  फीसदी नहीं, बल्कि 80 फीसदी वृद्धि होगी। इस साल कलेक्शन 18,000 से ज्यादा नहीं होने जा रहा और इसमें भी करीब 800 करोड़ वॉलंटरी कंप्लायंस स्कीम और अडवांस टैक्स वसूली के हैं।Ó ट्रेड सेल के कन्वेनर ब्रजेश गोयल ने कहा कि व्यापारियों को लेकर सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

वह न तो टैक्स बढ़ाने जा रही और न ही रेड डालने। मुख्यमंत्री का मानना है कि जो टैक्स भ्रष्टाचार के चलते न तो सरकार के पास आता है और न ही ट्रेडर की जेब में, उसे वसूलने पर काम होगा। उन्होंने कहा, 'किसी को बेवजह परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार व्यापारियों से राय लेकर ही कोई बड़ा फैसला करेगी। मुख्यमंत्री जल्द ही ट्रेडर्स के साथ मीटिंग करेंगे।

उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस मसले पर बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी यह एक आइडिया है, जो अधिकारियों से शेयर किया गया है। बात सिर्फ वैट की नहीं है, सिविक एजेंसियों से भी वित्तीय स्रोत और संसाधन तलाशने को कहा गया है।